Sunday, 7 December 2025

जीवन का‌ मकसद।

तुम साथ न दो मेरा ,चलना मुझे आता है।

हर आग से वाकिफ  हूं जलना मुझे आता है ।।

तकवीर के हाथॊ से तकदीर बदलनी है ।

जिंदगी और कुछ भी नही तेरी मेरी कहानी है ।।

इक्कीसवी सदी और हम‌ एक‌ ऐसा‌ दौर जहां पारंपरिक, भौतिक,शैक्षिक,सामाजिक,‌परिवर्तन बहुत तेजी से हो रहे है ।परंपराये टूट‌ रही‌ है ।घर विखर‌ रहे है ।और‌हम‌ आधुनिकता की‌दौड मे‌एक‌दूसरे से‌ इतना‌ आगे निकलने की चाह मे अपने जीवन को ही खत्म‌करते जा रहे है ।सभ्यता संस्कारो की जहां एक ओर‌परिभाचाये बदली बही शिबहन अ के‌मापदण्ड‌ भी और इस‌ प्रकार‌ शुरू हुआ एक नये युग का प्रारंभ ।

  • हमने जैसा वोया बैसा ही काटा ।जो जिसे दिया बैसा ही लौटकर हमारे पास‌आया ।प्यार और सम्मान दिया तो बही लौटकर आपको प्राप्त। होगा ।नफरत और घृणा करने बालो को देर सबेर बैसा ही प्रतिफल‌ मिलता है ।

जिंदगी की तलाश मे हम‌मौत के कितने पास‌आ गये ।

जव येसोचा तो घवरा गये ।आ गये हम‌कहां‌ आ गये ।।

पैलेस भवन मकान तो बहुत मिलेगे पर नही‌मिलेगा तो घर जहां आपके अपनो का प्यार हो सीठहाके हो शाम को चार लोग एक साथ वापस आकर वैठकर एक साथ गप्पे‌मारतेहो ।

गोविन्द पाराशरी 

बरेली 

शत नमन मां

आखिर 96 वर्ष की अवस्था के साथ शिथिल काया और मुख पर राधा रानी के नाम के साथ मां इस संसार से वीते 4दिसंवर को इस संसार से विदा हो गयी ।कहने बाले कुछ भी कहते रहे पर आज एक शानदार स्वर्णिम युग का अंत हो गया ।बह केवल हम चार भाइयो की मां नही अपितु सारे नगर मे पूज्य गुरु मां‌के रूप मे जानी जाती थी ।उनका जाना मेरे परिवार ही नही अपितु सारे नगर के लिए अपूर्णनीय क्षति है । 



आंखे नम है, आंशू भी‌सूख चुके ।अत्यधिक सादगी भरा जीवन और धार्मिक प्रवृति की रही मेरी मां ।वचपन से ही मैने मां‌को रामायण और व्रत य्योहारो पर धार्मिक अनुष्ठानो पर मांगलिक करमो तथा भजन कीर्तन करते हुए पाया ।वीते कुछ दिनो से राधारानी का जाप करती अपने प्रिय लड्डू गोपाल को स्नान ध्यान कराना और धार्मिक यात्राए करना ही उनका शौक रहा ।साहसी इतनी कि हर दुर्गम स्थानो पर अपनी नाती पोतो के साथ चलने को आतुर रहती थी मेरे भयीजे भी दादी नही अम्मा ही कहते रहे और उनकी डांट जब तक खा नही लेते तब तक चैन से नही बैठते 


आज मां‌भले ही हमारे बीच स्थूल शरीर के साथ नही है मगर उनका आत्मिक स्नेह और प्यार हम सबके साथ सदैव रहेगा ।बो मरकर भी अमर हो गयी है ।प्रभु ऎसी मां सबको प्रदान करे ।हम सब भाग्यशली है कि ऐसी पुण्यात्मा के पुत्र रूप मे आज है गर्व है मुझे अपनी मां पर ।



Naye rang

जीवन का‌ मकसद।

तुम साथ न दो मेरा ,चलना मुझे आता है। हर आग से वाकिफ  हूं जलना मुझे आता है ।। तकवीर के हाथॊ से तकदीर बदलनी है । जिंदगी और कुछ भी नही तेरी मेर...