सन 2020 अर्थात कोरोना काल के बाद उत्पन्न स्थिति पर नजर डाले तो हमने खोया ज्यादा है और पाया बहुत कम ।समाज का एक वर्ग जिसको मध्यम वर्ग कहा जाता है उसका इतना पतन कभी नही हुआ जितना कोराना के बाद उपजी दशाओ पर ।गरीब पहले भी थे और आज भी लेकिन इसकी संख्या अब पहले से बढकर कही ज्यादा हो गयी है ।
भारत युवाओ का देश है ।बो युवा जो चाहे तो अपनी योग्यता और साहस से इस देश को अग्रणी देशो कॊ पंक्ति मे खडा कर दे ।पर ,दूषित शिक्षा व्यबस्था के चलते युवा रोजगार से दूर होते जा रहे है ।तकनीकी के तेजी से बढते प्रभाव ने हमारी युवा शक्ति को नाकारा बना दिया है ।
इन्टरनैट का सही उपयोग न तो देश की भावी पीढी जानती है और न ही युवा पीढी ।सिनेमा, टीवी से होने बाला सांस्कृतिक प्रदूषण पहले भी था पर आज सस्ते इन्टरनॆट ने इसमे आशातीत वृद्धि की है ।तथा समाज मे अश्लीलता अपने चरम पर है ।परिवारो मे कलह ,एकाकीपन,केवल स्वयं मे मस्त रहने बाल समाज आज हमारे सामने है जहां न अब रिश्ते बचे है न संवेदनाये सहानुभूति, और भावनाये ।
बढती मंहगाई पर कोई भी सरकार अंकुश नही लगा सकती पर देश मे रोजगार के अवसर ही समाप्त हो जाये तो उसका असर समाज और देश पर पडता ही है ।मुफ्त मे जनता को कोई भी बस्तु राशन, चिकित्सा, शिक्षा ,किसानो के लोन माफ करना, छात्रवृ मिड डे मील ,आदि इन सब पर जो लाखो करोडो प्रति वर्ष सरकार व्यय करती है बो स्वयं नही करती ।वोट बैंक तथा सत्ता सुख के चलते करती है पर उसका सारा बोझ जनता पर डाल दिया जाता है ।इसीलिए रोटी कपडा और मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताये भी एक मध्यम वर्ग पूरी नही कर पाता ।
गोविन्द पाराशरी
बरेली
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