Sunday, 2 March 2025

नयी उमंग नया उत्साह

 छूना है आसमान 

वेटी बचाओ बेटी पढाओ ।समय की आवश्यकता है अपनी वेटियो को आत्मनिर्भर बनाने की वर्तमान समय तेजी से बदल रहा है ।नवीन तकनीकी का ज्ञान ही उनको आत्मनिर्भर बना सकता है ।अब बो समय नही रहा जब हमारे घर मे‌ पुराने वावा दादी कहते थे ।का करिहै पढि लिख कै सेंकनो तो रोटी ही है ।शिक्षा स्वास्थ्य और तकनीक का‌ प्रयोग करके वेटियो को आगे बढने मे मदद करें ।बरना बो दिन दूर नही जब हमारी वेटियां गरीबी अशिक्षा के चंगुल‌मे फंसी होने के कारण दर दर की ठोकर खाने को मजबूर होंगी माता शत्रु पिता वैरी येन वालो न पाठितः। गोविन्द हरीश पाराशरी बरेली





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तुम साथ न दो मेरा ,चलना मुझे आता है। हर आग से वाकिफ  हूं जलना मुझे आता है ।। तकवीर के हाथॊ से तकदीर बदलनी है । जिंदगी और कुछ भी नही तेरी मेर...